Saturday, March 29

Ghazal...

This is a small and honest effort by me to write a ghazal... i hope u like it and i am looking forward for your critical remarks to improve upon it in future. :)
For all my blogger friends who dont know Hindi, just leave me ur email, and i will send u an translated version, though i dont know how much sense it will make...




तू है एक हसीं नगमा
जिसे गुनगुनाने को जी चाहता है
तू है वो हँसी
जिसे होठों पे लाने को जी चाहता है

तेरा हँसना
मुस्कुराना
सितम है जालिम
फिर भी तुझे अजमाने को
जी चाहता है

तेरी चूड़ी
तेरी पायल का खनकना जालिम
दिल के हर जर्रे पर
सितम धाता है

तेरे हँसने की खनक
तेरे चेहरे की अदा
तेरा चुप रहके भी
सब कह जाना

तेरा चलना
चलके थमना
फिर यूं इतराना
हाय जालिम
क़यामत का जैसे मंजर हो...

तेरे आने की आहट
पर भी हम मरते हैं
तुझसे ऐ हमदम कहें कैसे
कितना हम डरते हैं

हँसते हँसते तेरे सब जुल्म
यूं सहेंगे हमदम
तेरी बस अदाओं के सहारे
जी लेंगे हम...